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कानूनी नोटिस कैसे भेजा जाता है?

कानूनी नोटिस भेजने के लिए किसी वकील से नोटिस तैयार करवाएँ जिसमें पूरी घटना, आपकी माँग और जवाब देने की समय-सीमा (आमतौर पर 15–30 दिन) लिखी हो। इसे रजिस्टर्ड पोस्ट A.D. से भेजें और रसीद तथा नोटिस की कॉपी सँभालकर रखें। चेक बाउंस के मामले में बैंक मेमो मिलने के 30 दिन के भीतर नोटिस भेजना कानूनन अनिवार्य है। वकील की फीस आम तौर पर ₹1,000–₹5,000 होती है।

कानूनी नोटिस एक औपचारिक चेतावनी है — यह बताती है कि अगर आपकी माँग पूरी नहीं हुई तो आप अदालत जाएँगे। ज़्यादातर विवाद नोटिस के स्तर पर ही सुलझ जाते हैं, इसलिए इसे सही तरीके से भेजना बहुत ज़रूरी है।

कानूनी नोटिस कब ज़रूरी है?

नोटिस में क्या-क्या होना चाहिए?

  1. भेजने वाले और पाने वाले का नाम-पता
  2. पूरी घटना तारीखों के साथ
  3. आपकी कानूनी माँग — कितनी रकम, क्या कार्रवाई
  4. जवाब देने की साफ समय-सीमा (15 या 30 दिन)
  5. चेतावनी कि समय पर जवाब न मिलने पर कानूनी कार्रवाई होगी
  6. वकील के लेटरहेड पर वकील के हस्ताक्षर — इसका असर कहीं ज़्यादा होता है

भेजने का सही तरीका

रजिस्टर्ड पोस्ट A.D. (Acknowledgment Due) से भेजें — डिलीवरी की रसीद ही अदालत में आपका सबूत है। साथ में ईमेल से कॉपी भेजना अच्छी आदत है। नोटिस की एक हस्ताक्षरित कॉपी, पोस्टल रसीद और acknowledgment कार्ड सँभालकर रखें।

खर्च कितना आता है?

सामान्य मामलों (वसूली, किराया, सेवा में कमी) में वकील की फीस ₹1,000–₹5,000। Advice Bazaar पर वकील तय कीमत पर नोटिस ड्राफ्टिंग की सेवा देते हैं — कीमत पहले से पता होती है।

नोटिस के बाद क्या होता है?

यह लेख सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। अपने मामले के लिए योग्य वकील से सलाह लें।

Frequently asked questions

क्या मैं बिना वकील के खुद कानूनी नोटिस भेज सकता हूँ?

हाँ, कानूनन भेज सकते हैं। लेकिन वकील के लेटरहेड पर भेजा गया नोटिस ज़्यादा गंभीरता से लिया जाता है और ड्राफ्टिंग की गलतियों (गलत माँग, गलत धारा) से बचाता है।

कानूनी नोटिस का जवाब कितने दिन में देना होता है?

जो समय-सीमा नोटिस में लिखी हो — आम तौर पर 15 या 30 दिन। चेक बाउंस में कानून ने 15 दिन तय किए हैं। नोटिस मिले तो अनदेखा न करें — वकील से मिलकर सोच-समझकर जवाब भिजवाएँ।

क्या WhatsApp या ईमेल से भेजा नोटिस मान्य है?

कुछ मामलों में अदालतों ने इलेक्ट्रॉनिक नोटिस स्वीकार किया है, लेकिन रजिस्टर्ड पोस्ट A.D. ही सबसे पक्का सबूत है। सबसे अच्छा तरीका: रजिस्टर्ड पोस्ट + ईमेल कॉपी।

नोटिस के बाद केस करना ज़रूरी है क्या?

नहीं। नोटिस भेजने के बाद समझौता करना, बातचीत करना या केस न करना — सब आपकी मर्ज़ी है। लेकिन चेक बाउंस जैसे मामलों में केस दायर करने की समय-सीमा सख्त है, इसलिए वकील से समय रहते सलाह लें।

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