चेक बाउंस होने पर क्या करें?
अगर आपको दिया गया चेक बाउंस हो जाए, तो बैंक का रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिन के भीतर चेक देने वाले को लिखित डिमांड नोटिस भेजें। उसे भुगतान के लिए 15 दिन मिलते हैं। भुगतान न होने पर अगले 1 महीने के भीतर मजिस्ट्रेट कोर्ट में धारा 138 के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करें — सज़ा 2 साल तक की जेल या चेक की रकम का दोगुना जुर्माना, या दोनों।
चेक बाउंस भारत के सबसे आम कानूनी मामलों में है — और सबसे सख्त समय-सीमाओं वाला भी। एक तारीख चूकी, तो मज़बूत केस भी कमजोर पड़ जाता है।
धारा 138 कब लागू होती है?
- चेक किसी कानूनी देनदारी (उधार, बकाया, बिल) के बदले दिया गया हो
- चेक उसकी तारीख से 3 महीने के भीतर बैंक में लगाया गया हो
- बैंक ने “insufficient funds” या “payment stopped” जैसे कारण से लौटाया हो
समय-सीमा — हर तारीख याद रखें
| कदम | समय-सीमा |
|---|---|
| 1. चेक बैंक में लगाना | चेक की तारीख से 3 महीने के भीतर |
| 2. बैंक से रिटर्न मेमो मिलना | — |
| 3. लिखित डिमांड नोटिस भेजना | मेमो मिलने के 30 दिन के भीतर |
| 4. सामने वाले के पास भुगतान का समय | नोटिस मिलने से 15 दिन |
| 5. मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत | 15 दिन पूरे होने के बाद 1 महीने के भीतर |
सज़ा और वसूली
- दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की जेल या चेक की रकम का दोगुना जुर्माना, या दोनों
- धारा 143A: केस चलते-चलते ही अदालत चेक की रकम का 20% तक अंतरिम मुआवज़ा दिलवा सकती है
- मूल रकम की वसूली के लिए अलग से सिविल केस भी किया जा सकता है
केस कहाँ दर्ज होगा?
उस मजिस्ट्रेट कोर्ट में जिसके क्षेत्र में आपका बैंक (जहाँ आपने चेक लगाया) स्थित है।
अगर आपका चेक बाउंस हुआ है (आप देनदार हैं)
नोटिस को अनदेखा न करें। 15 दिन के भीतर भुगतान कर देने से अपराध समाप्त हो जाता है। अगर देनदारी विवादित है (चेक चोरी हुआ, सिक्योरिटी के लिए दिया था, हिसाब पहले चुक गया) तो वकील के ज़रिए समय पर जवाब भिजवाएँ।
यह लेख सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। अपने मामले के लिए योग्य वकील से सलाह लें।
Frequently asked questions
चेक बाउंस केस की समय-सीमा क्या है?
तीन घड़ियाँ चलती हैं: चेक 3 महीने में बैंक में लगाएँ; मेमो मिलने के 30 दिन में नोटिस भेजें; 15 दिन की मोहलत खत्म होने के 1 महीने के भीतर केस दर्ज करें। देरी पर अदालत उचित कारण होने पर ही छूट देती है।
क्या चेक बाउंस अपराध है?
हाँ — धारा 138 Negotiable Instruments Act के तहत आपराधिक मामला है। सज़ा 2 साल तक की जेल या चेक की रकम का दोगुना जुर्माना, या दोनों। समझौते (compounding) से केस खत्म भी हो सकता है।
क्या केस चलते हुए भी कुछ पैसा मिल सकता है?
हाँ — धारा 143A के तहत अदालत ट्रायल के दौरान ही चेक की रकम का 20% तक अंतरिम मुआवज़ा दिलवा सकती है। बाकी वसूली सज़ा/समझौते या सिविल केस से होती है।
चेक बाउंस का केस कितना चलता है?
कानून में 6 महीने में समरी ट्रायल का लक्ष्य है, पर व्यवहार में लड़े गए केस 1–3 साल चलते हैं। बड़ी संख्या में मामले नोटिस या शुरुआती सुनवाई में ही समझौते से निपट जाते हैं।







